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 नमस्कार लोकतंत्र की धरती पर किसानों का कब्जा जमाना हर किसी के लिए चिंता का विषय बन चुका था। सरकार लगातार कृषि कानून को किसानों के हित में बता रही थी लेकिन किसान इस कानून को सिरे से खारिज करने की मांग पर अड़े हैं। किसान आंदोलन के दौरान कई हिंसक झड़प भी देखने को मिली। यह सिलसिला बदस्तूर जारी रहा और इन सबके बीच 26 जनवरी के दिन किसानों का ट्रैक्टर मार्च भूले नहीं होता। हमेशा 26 जनवरी के दिन रायसीना हिल सुर्खियों में छा जाता है एक से बढ़ कर एक तस्वीर रायसीना हिल्स देखने को मिलती है और 15 अगस्त को लाल किला सुर्खियों में छा जाता है लेकिन 26 जनवरी के दिन किसानों के ट्रैक्टर मार्च ने पूरी तस्वीर को बदल कर रख दिया। खून खराबे और इस हिंसक प्रदर्शन में विदेशों के भी तार जुड़ने लगे। 



 
लेकिन किसानों के लिए हमेशा सोचने वाली केंद्र की मोदी सरकार ने किसानों की मांग और उनकी परेशानी को देखते हुए तीनों कृषि कानून को रद कर दिया। एक तरफ जहां पीएम मोदी के फैसले की तारीफ कर रहे है तो वहीं दूसरी तरफ किसान अभी भी अपने अड़ियल रवैये पर नजर आ रहे हैं।
 
दरअसल कृषि सुधार कानून को वापस लिए जाने की पीएम नरेंद्र मोदी की घोषणा के बाद रविवार को संयुक्त किसान मोर्चा की बैठक हुई। बैठक के बाद संयुक्त किसान मोर्चा के नेता बलबीर सिंह ने ट्रैक्टर मार्च का एलान किया। कृषि कानून पर राग अलापने वाले जिन किसानों को प्रधानमंत्री मोदी के एलान के बाद खेत खलिहान में होना चाहिए था अभी तक ट्रैक्टर मार्च करने की रणनीति बना रहे हैं।
 
इस बार उनका ट्रैक्टर मार्च संसद भवन की तरफ निकलेगा जिसके बाद लाल किले की पुरानी तस्वीर साझा होती है। बैठक के दौरान मोर्चा के नेता बलबीर सिंह ने कहा बैठक में कानून वापसी पर चर्चा हुई। बैठक में कुछ फैसले हुए हैं। पहले से तय प्रोग्राम चलते रहेंगे। 27 नवंबर को फिर से संयुक्त किसान मोर्चा की बैठक होगी। जो मांगे बाकी रह गए हैं उस पर पीएम को ओपन लेटर लिखा जाएगा।
बता दें कि सिंघु बॉर्डर पर करीब तीन घंटे तक किसान मोर्चा की बैठक चली। बैठक की अध्यक्षता कर रहे बलबीर सिंह ने प्रेस कॉन्फ्रेंस करके बैठक में लिए गए फैसलों को सामने रखा।
 
बलवीर सिंह ने कहा बैठक में आज पीएम मोदी के कृषि कानून वापस लिए जाने पर चर्चा हुई। SKM में आगे की रणनीति बनाई है जिसके तहत अब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को एक खुला पत्र लिखेंगे जिसमें एमएसपी, बिजली संशोधन बिल, किसानों पर दर्ज मुकदमे और किसान आंदोलन पर किसानों की मौत वह क्या फैसला लेंगे ये पूछा जाएगा।
 
बैठक के बाद बलवीर सिंह ने कहा हमने मीटिंग में तय किया है कि जो कार्यक्रम किसान मोर्चा ने पहले तय किए थे वो आगे भी जारी रहेंगे।
 
27 तारीख को फिर से संयुक्त मोर्चा की मीटिंग होगी जो बाकी मांगे रखी गई है उसके बारे में पीएम को पत्र लिखा जाएगा।
 
उन्होंने कहा 29 नवंबर को संसद तक ट्रैक्टर मार्च होगा।
 
पराली कानून, बिजली बिल, एमएसपी कानून को लेकर सरकार को खुली चिट्ठी लिखेंगे।

 
बता दें सुधार कानून वापस लिए जाने के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की घोषणा के बावजूद किसान संगठन प्रदर्शन जारी रखेंगे।
 
संयुक्त किसान मोर्चा ने रविवार को बैठक कर निर्णय लिया कि आंदोलन के लिए पहले जो कार्यक्रम निर्धारित किए गए थे वो जारी रहेंगे 


 

  • 22 नवंबर को लखनऊ में किसानों की महापंचायत है



  • 26 नवंबर को किसान आंदोलन का एक साल पूरा हो जाएगा।

 

  • इस दौरान सभी मोर्चों पर भीड़ बढ़ाई जाएगी। संसद का शीतकालीन सत्र शुरू हो जाएगा।

 

  • 29 नवंबर को किसान संसद की तरफ कूच करेंगे।

 
आपको बता दें केंद्र की मोदी सरकार हमेशा से किसानों के हित के लिए सोचती रही है और मोदी सरकार के राज में किसानों की हालत पहले से ज्यादा सुधरी हुई है लेकिन किसानों के तेवर नरम पड़ने के बजाय उसे अड़ियल रवैये पर टिके हुए हैं।
 
 
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